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* शुभ संध्या *
*"जिस तरह थोडी सी औषधि*
*भयंकर रोगों को शांत कर देती है!*
*उसी तरह ईश्वर की थोडी सी स्तुति*
*बहुत से कष्ट और दुखों*
*का नाश कर देती है!"*
*भयंकर रोगों को शांत कर देती है!*
*उसी तरह ईश्वर की थोडी सी स्तुति*
*बहुत से कष्ट और दुखों*
*का नाश कर देती है!"*
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*"आशाएं ऐसी हो जो-*
*मंज़िल तक ले जाएँ,*
*मंज़िल ऐसी हो जो-*
*जीवन जीना सीखा दे..!*
*जीवन ऐसा हो जो-*
*संबंधों की कदर करे,*
*और संबंध ऐसे हो जो-*
*याद करने को मजबूर कर दे..!!*
*मंज़िल तक ले जाएँ,*
*मंज़िल ऐसी हो जो-*
*जीवन जीना सीखा दे..!*
*जीवन ऐसा हो जो-*
*संबंधों की कदर करे,*
*और संबंध ऐसे हो जो-*
*याद करने को मजबूर कर दे..!!*
*"दुनियां के रैन बसेरे में..*
*पता नही कितने दिन रहना है,*
*"जीत लो सबके दिलों को..*
*बस यही जीवन का गहना है.*
*शुभ संध्या*
*पता नही कितने दिन रहना है,*
*"जीत लो सबके दिलों को..*
*बस यही जीवन का गहना है.*
*शुभ संध्या*
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